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The history of DVC OBC Employees Welfare Association aka DVC Backward Classes Association is a history of historical injustice.
डीवीसी ओबीसी इम्पलाईज वेलफेयर एसोसिएशन उर्फ डीवीसी पिछड़ा वर्ग संघ
डीवीसी ओबीसी इम्पलाईज वेलफेयर एसोसिएशन उर्फ डीवीसी पिछड़ा वर्ग संघ का इतिहास ऐतिहासिक अन्याय का इतिहास है। 06 सितंबर 1993 को पटेल सेवा संघ के कोर कमिटी द्वारा पटेल जयंती का आयोजन हेतु बैठक के दौरान श्री कन्हैया प्रसाद सिंह (के. पी. सिंह) द्वारा एक प्रस्ताव रखा गया कि हम जातिगत रुप से पटेल जयंती का आयोजन करते हैं क्यों नहीं ओबीसी के सारे लोगों को शामिल कर पिछड़ों का एक बड़ा समूह खड़ा किया जाय, एकाध लोगों को छोड़कर सभी लोगों को बात बहुत पसंद आई और उसी दिन पिछड़ा वर्ग संघ का गर्भ धारण हुआ लेकिन समस्त पिछड़े को एकजुट करने यानि पब्लिक डोमेन में चर्चा करते हुए कई माह पश्चात् आखिरकार वर्ष1994 के आरंभ में विधिवत रुप से डीवीसी पिछड़ा वर्ग संघ की स्थापना हुई। संघ के गठन के बाद नेतृत्व को लेकर तथाकथित दो जाति के बीच रस्साकशी थी जिसे के. पी. सिंह जी के सूझबूझ से एक निर्विवाद केन्द्रीय कार्यकारिणी कमिटी का चुनाव हुआ जिसमें श्री गिरिजेश्वर प्रसाद को महासचिव का दायित्व दिया गया तथा मैथन शाखा सचिव के रूप में स्व. महेश प्रसाद को दायित्व मिला। आरम्भ में संघ की चुनौती पूर्ण संघर्ष से ऐतिहासिक उपलब्धि सहायक प्रचालकों की विशेष भर्ती के रूप में हासिल हुई, और इस संघर्ष के लिए संस्थापक सदस्य स्व. राम लखन चौधरी, स्व. बृज शंकर यादव, स्व. महेश प्रसाद, स्व. डी.एन.सिंह, स्व. एस. के. सिन्हा, श्री कृष्ण कुमार, श्री गुप्तेश्वर ठाकुर, श्री शिवनाथ यादव, श्री दुधनाथ यादव, श्री मुख्यतार चौधरी, श्री प्रेम सिंह, श्री राजा राम सिंह आदि के साथ साथ श्री के. पी. सिंह (संस्थापक) के सहयोग को भूला नहीं जा सकता साथ ही श्री सुशील सिंह, धनबाद (जदयू नेता) का बिहार सरकार से सामंजस्य के अमूल्य योगदान के कारण विशेष रूप से याद किए जायेगें। वर्ष 1998 के बाद लगभग संघ मृतप्राय हो गई, जिसका मुख्य कारण था स्व. महेश प्रसाद का इस दुनिया से चले जाना। कालांतर में संघ की गतिविधि महासचिव के घर तक सीमित होकर रह गई और ये सिलसिला वर्ष 2018(लगभग 20 वर्षों) तक चलता रहा और शिथिल सा पड़ा रहा। यद्यपि के. पी. सिंह जी(डीवीसी पिछड़ा वर्ग संघ के संस्थापक) वर्ष 2017 से चन्द्रपुरा थर्मल में जन जागरण के प्रयास किये लेकिन परिणात्मक सफलता नहीं मिली लेकिन एक दो सक्रिय कार्यकर्ताओं की पहचान हुई। यद्यपि स्थानीय पिछड़े वर्ग के लोगों को लेकर वर्ष 2018 और 2019 में विनोद बिहारी महतो जयंती तथा पटेल जयंती का आयोजन करवाया जिसके साझी माननीय शिक्षा मंत्री स्व जगन्नाथ महतो जी भी बने। वर्ष 2020 में श्री के. पी. सिंह जी बोकारो थर्मल जाने के बाद पिछड़ों को एकजुट करने के अभियान में लगे रहे, अनुकूल सफलता भी मिली क्योंकि बोकारो थर्मल में सबसे पुराने संस्थापक सदस्य श्री राम लखन चौधरी जी का कार्य क्षेत्र रहा है और परिणामस्वरूप वर्ष 2021 में जब अखिल घाटी स्तर पर ओबीसी की एक आम सभा हुई जिसमें नौ प्रोजेक्ट (मैथन डैम, पंचेत डैम, मेजिया थर्मल, चंद्रपुरा थर्मल, बोकारो थर्मल, कोनार डैम, बेरमो माईन्स, रघुनाथपुर थर्मल, पुटकी आदि) के नये पुराने समस्त कार्यकर्ताओं ने मिलकर बहुत ही लोकतांत्रिक ढंग से एक ओबीसी संगठन का गठन किया और नये नाम और स्वरूप में स्वीकार किया गया तथा विधिवत् उसका निबंधन कराया गया । सम्प्रति, वह संगठन दामोदर वैली कारपोरेशन अदर्स बैकवर्ड क्लासेस इम्पलाईज वेलफेयर एसोसिएशन (डीवीसी ओबीसी इम्पलाईज वेलफेयर एसोसिएशन) के नाम से जाना जाता है जिसकी कुल निबंधित सदस्य संख्या लगभग 800 है। कुल चौदह परियोजनाओं की शाखाओं में शाखा समिति का गठन हो चुका है। डीवीसी ओबीसी इम्प्लाईज वेलफेयर एसोसिएशन को अखिल भारतीय स्तर पर आल इंडिया बैकवर्ड क्लास फैडरेशन से भी संबद्धता प्राप्त है।
डीवीसी ओबीसी इम्प्लाईज वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से पिछले दो सालों से प्रबंधन को मान्यता हेतु आग्रह किया जा रहा है लेकिन प्रबंधन की ओर से दो संगठन होने का हवाला देकर न तो मान्यता दे रहा है और न मान्यता देने की दिशा में कोई पहल कर रहा है, बल्कि टाल मटोल की नीति में ओबीसी इम्प्लाईज का बड़ा नुकसान किया जा रहा है। और इन सारे नुकसान का श्रेय डीवीसी पिछड़ा वर्ग संघ के चंद ठेकेदार और डीवीसी प्रबंधन के कुछ अधिकारी जो ओबीसी के खिलाफ हैं, को जा रहा है , ऐसा समस्त निगम के बहुसंख्यक ओबीसी इम्प्लाईज की ओर से कहा जा रहा है।
यद्यपि मान्यता का विषय उर्जा मंत्रालय, भारत सरकार में डायरेक्टर सह ओबीसी के लायजन आफिसर और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष श्री गंगाराम अहिर के समक्ष उठाया गया है जिसको लेकर महासचिव, डीवीसी ओबीसी इम्प्लाईज वेलफेयर एसोसिएशन को आश्वस्त किया गया कि यदि प्रबंधन इस विषय पर गंभीर नहीं है तो दिल्ली बुलाकर पूछा जायेगा और अग्रेत्तर कार्रवाई की जायेगी।